अल्लाह से दोस्ती करो, बेशक वही सच्चा दोस्त है।

By Sufi Aijaz Alam Khan Qadri

अल्लाह से दोस्ती — वही सच्चा सहारा है
अल्लाह से दोस्ती करो, बेशक वही सच्चा दोस्त है।
दुनिया में इंसान के बहुत से रिश्ते होते हैं—अपने, पराए, दोस्त और चाहने वाले। लेकिन अक्सर दुनियावी रिश्तों की हकीकत यह है कि इंसान से थोड़ी-सी गलती क्या हो जाए, वही लोग बुराई पर उतर आते हैं, शिकायतें शुरू हो जाती हैं और कभी-कभी रिश्तों में दूरियां तक पैदा हो जाती हैं।
लेकिन अल्लाह का रिश्ता ऐसा नहीं है।
बंदा कितनी ही बार गिर जाए, कितनी ही गलतियां कर बैठे, अगर सच्चे दिल से अपने रब की तरफ लौट आए तो अल्लाह अपने बंदे को अपनी रहमत से मायूस नहीं करता। जब दुनिया हाथ छोड़ देती है, तब भी अल्लाह हाथ थामे रहता है। जब अपने दूर हो जाते हैं, तब भी वह करीब रहता है। जब कोई समझने वाला नहीं होता, तब भी वह हमारे दिल का हाल जानता है।
इसलिए दुनिया के रिश्ते निभाइए, सबके साथ मोहब्बत रखिए, लेकिन अपने रब से रिश्ता सबसे मजबूत रखिए।
अल्लाह से रिश्ता मजबूत करने के लिए नमाज़ को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाइए, कुरआन पाक को सिर्फ पढ़िए नहीं बल्कि समझने की कोशिश कीजिए, हमेशा सच बोलिए, ग़ीबत से अपनी ज़बान को बचाइए और हर हाल में अपने रब को याद रखिए।
क्योंकि रूह की असली रोशनी दुनिया की चमक से नहीं, अल्लाह की याद से मिलती है।
जब दिल टूटे—अल्लाह को पुकारो।
जब रास्ते बंद हों—अल्लाह पर भरोसा करो।
जब कोई साथ न दे—अल्लाह का साथ तलाश करो।
और जब कोई गलती हो जाए—मायूस होकर दूर मत भागो, बल्कि तौबा करके उसी के दर पर लौट आओ।
याद रखिए—दुनिया वाले आपकी एक गलती को याद रख सकते हैं, लेकिन अल्लाह सच्ची तौबा को पसंद करता है।
इसलिए अपने दिल को दुनिया के सहारों से ज्यादा अल्लाह के सहारे से जोड़िए। नमाज़ से रिश्ता मजबूत कीजिए, कुरआन से रिश्ता जोड़िए, ज़िक्र को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाइए, सच को अपना साथी बनाइए और ग़ीबत से अपनी ज़बान को पाक रखिए।
अल्लाह से दोस्ती कर लो,
क्योंकि वही ऐसा दोस्त है जो गिरने पर उठाता है,
टूटने पर संभालता है,
भटकने पर रास्ता दिखाता है
और दुनिया से दूरियां होने के बावजूद
अपने बंदे को कभी अकेला नहीं छोड़ता।
दुनिया से रिश्ते रखो, मगर दिल का सबसे मजबूत रिश्ता अल्लाह से रखो।
क्योंकि जब सब साथ छोड़ दें,
तब भी तुम्हारा रब तुम्हारे साथ होता है।
ऐ अल्लाह! हमारे दिल को अपनी मोहब्बत से भर दे, हमारी नमाज़ों को अपनी याद से रोशन कर दे, हमें कुरआन को समझकर पढ़ने और उस पर अमल करने की तौफीक़ दे, हमारी ज़बान को झूठ और ग़ीबत से बचा और हमें हर हाल में अपना सच्चा बंदा बनाए रख। आमीन।
— सूफी एजाज आलम खान कादरी

संपर्क नंबर 9451437422

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